Wednesday, February 1, 2023
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उधार की खिचड़ी खा रहे हैं आंगनबाड़ी के बच्चे, सात महीने से नहीं मिली राशि

झारखण्ड।  नौनिहालों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ पौष्टिक आहार देने के लिए संचालित आंगनबाड़ियों की स्थिति धनबाद जिले में ठीक नहीं हैं। केंद्र हैं तो बच्चों की उपस्थिति कम हैं। कुछ केंद्र तो प्राय: बंद ही मिलते हैं। केंद्रों में आने वाले बच्चों को आहार तो मिलता है लेकिन यह कितना पौष्टिक है, यह तो जांच का विषय है। आंगनबाड़ी केंद्रों में मौजूद सेविका-सहायिकाओं का कहना है कि सरकार की जो भी व्यवस्था है, उसी के आधार पर केंद्रों का संचालन किया जा रहा है।

उधार पर ही बच्चों के लिए पोषाहार की व्यवस्था होती है। चावल तो सरकार की ओर से मिल जाता है लेकिन अन्य सामग्रियों की खरीद उधार पर ही होती है। शुक्रवार दिन के 11.30 बजे बाबूडीह आंगनबाड़ी कोड नंबर-278 वार्ड संख्या-20। मुख्य प्रवेश द्वार (गेट) बंद हैं। गेट खोलकर अंदर जाने पर केंद्र का कार्यालय खुला था। कमरा भी खुला था लेकिन वहां न तो सेविका है और न ही कोई सहायिका। बच्चे भी नहीं हैं। ऐसे में कोई जानकारी देने वाला भी नहीं मिला।

11.45 बजे विशुनपुर आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका-सहायिका तथा पोषण सखी तीनों मौजूद थीं। सेविका माया देवी ने बताया कि केंद्र में 37 बच्चे निबंधित हैं। हालांकि क्लास में बच्चे की संख्या उतनी नहीं थी। बच्चों के लिए खाना बनाया गया था। सेविका ने बताया कि मार्च महीने तक की पोषण की राशि का भुगतान कर दिया गया है। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी स्नेह कश्यप ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषण राशि का भुगतान किया जा रहा है। मार्च महीने तक की राशि दे दी गई है। अप्रैल से जून तक का बिल तथा वाउचर की मांग की गई है। बिल जमा करने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी होगी और राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

तोपचांची प्रखंड के रंगरीटांड़ आंगनबाड़ी केंद्र में सात माह से फंड नहीं मिलने की वजह से बच्चों को रोजाना खिचड़ी दी जाती है और वह भी किराने की दुकान के सहारे। किराने दुकान से उधार लेकर आंगनबाड़ी सहायिका और सेविका यहां बच्चों को खिचड़ी खिला रही है। केंद्र में 30 बच्चे हैं। यहां की सेविका संध्या देवी तथा सहायिका कौशल्या देवी ने बताया कि लॉकडाउन में दो महीने सखी मंडल द्वारा सहयोग दिया गया था। उसके बाद आजतक फंड नहीं आया है। चार माह से राशि नहीं मिलने का असर झरिया के आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों के निवाला पर पड़ रहा है। आंगनवाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका किराना दुकान से उधार लेकर बच्चों को खिचड़ी खिला रही हैं। नाश्ते में मिलने वाला सूजी का हलवा कभी-कभार ही मिल पाता है।

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